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जरबेरा की खेती कैसे करें, जानिए किस्में, देखभाल और पैदावार

Posted on December 15, 2020December 15, 2020 By User No Comments on जरबेरा की खेती कैसे करें, जानिए किस्में, देखभाल और पैदावार


जरबेरा बहुवर्षीय कर्तित पुष्प वर्ग का पौधा है| इसकी उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है| जरबेरा पुष्प की खेती अलंकृत बागवानी में सजावट एवं गुलदस्ता बनाने के लिए की जाती है| छोटी किस्म की प्रजातियों को गमलों में सुन्दरता के लिए भी उगाया जाता है| इसके कर्तित पुष्प लगभग एक सप्ताह तक तरोताज़ा बने रहते हैं| इसकी लगभग 70 प्रजातियाँ हैं| जिसमें 7 का उत्पत्ति स्थल भारत या आस पास का माना गया है|

जरबेरा की खेती विश्व में नीदरलैण्ड, इटली, पोलैण्ड, इजरायल और कोलम्बिया में की जा रही है| भारत में इसकी खेती व्यवसायिक स्तर पर घरेलू बाजार में बेचने हेतु की जा रही है| धरेलू पुष्प बाजारों में जरबेरा कट फ्लावर की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है| इसके प्रजातियों को सिंगल, सेमी डब्बल और डबल वर्गों में विभाजित किया गया है|
जरबेरा कट फ्लावर व्यवसाय में डब्बल प्रजातियों की मांग सर्वाधिक है| यदि उत्पादक बन्धु जरबेरा की खेती वैज्ञानिक तकनीक से करें, तो इसकी फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है| इस लेख में जरबेरा की खेती उन्नत तकनीक से कैसे करें की जानकारी का उल्लेख किया गया है|
उपयुक्त जलवायु
इसके पौधों की अच्छी वृद्धि एवं विकास के लिए दिन का तापमान 20 से 25 सेंटीग्रेड तथा रात का तापमान 12 से 15 डिग्री सेंटीग्रेड अच्छा माना गया हैं| लेकिन जिन स्थानों का तापमान कुछ दिनों के लिए गर्मी के महीनों में 30 से 35 सेंटीग्रेड तथा जाड़े के महीनों में रात को न्यूनतम तापमान 3 से 4 सेंटीग्रेड तक जाता हो, वहां पर भी इसकी खेती की जा सकती हैं|

इसका 12 घण्टे की प्रकाश अवधि में अच्छा पुष्प उत्पादन पाया गया है| मैदानी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती पॉलीहाउस में ही सफलतापूर्वक की जा सकती है| लेकिन कटीबन्धी तथा उष्ण-कटबंधीय वातावरण में जहाँ पर ठंड हो वहाँ पर भी इसकी खेती की जा सकती हैं|

भूमि का चयन

जरबेरा की खेती लगभग हर प्रकार की मिट्टी में की जा सकती हैं| इसकी जड़े 30 सेंटीमीटर गहराई तक जाती हैं| बलुई दोमट मिट्टी जिसका पी एच मान 6 से 7 हो तथा जीवांश पदार्थ की प्रचूर मात्रा के साथ साथ जल निकास का उचित प्रबन्ध हो, सर्वोत्तम पायी गई हैं| यदि बलुई दोमट मिट्टी नहीं हैं, तो चिकनी मिट्टी में जीवांश पदार्थ (गोबर की खाद या पत्तियों की सड़ी खाद) अधिक मात्रा में तथा बालू मिटटी क्यारी बनाने से पहले मिला देते हैं| क्यारीयां बनाने से पहले मिट्टी की 30 से 40 सेंटीमीटर गहरी खुदाई करके भुरभुरा तथा खरपतवार रहित कर लेते हैं|
उन्नत किस्म

जरबेरा की व्यापारिक खेती के लिए निम्नलिखित किस्मों को लगाया जाता है| जो इस प्रकार है, जैसे- डस्टी (लाल), फ्लेमिन्गो (पेल रोज), फ्रेडेजी (गुलाबी), फ्रेडकिंग (पीला), फ्लोरिडा (लाल), मारोन क्लेमेन्टीन (नारंगी), नाडजा (पीला), टैराक्वीन (गुलाबी), यूरेनस (पीला), वेलेन्टाइन (गुलाबी), वेस्टा (लाल) आदि प्रमुख है|

प्रवर्धन की विधि
जरबेरा का प्रवर्धन बीज तथा वानस्पतिक भागों द्वारा किया जाता है| बीज द्वारा प्रवर्धन नयी जातियों को विकसित करने के लिए किया जाता है| वानस्पतिक विधि द्वारा प्रवर्धन करने से पौधे पैतृक जैसे ही उत्पादित होते हैं| इस विधि द्वारा जरबेरा का प्रवर्धन कलम्प विभाजन द्वारा किया जाता है| कलम्प विभाजन विधि द्वारा कम समय में बड़े पैमाने पर पौधों को तैयार नहीं किया जा सकता है| बड़े पैमाने पर रोगमुक्त पौधे उत्तक संवर्धन विधि द्वारा तैयार किये जाते है|

कलम्प विभाजन- पहाड़ी क्षेत्रों में जरबेरा के कलम्प का विभाजन सितम्बर के पहले सप्ताह तथा मैदानी क्षेत्रों में जून से जुलाई में किया जाता है| कलम्प विभाजन के बाद तथा पुनः कलम्प को रोपित करने से पहले कलम्प से कुछ पत्तों के उपरी आधे हिस्से को काट देना चाहिए, केवल दो से तीन नये पत्ते रखे जाते हैं| कलम्प को लगाने में यह सावधानी रखी जाती है, कि कलम्प के बीच का भाग मिट्टी में नहीं दबना चाहिए|

पौध उखाड़ने तथा कलम्प विभाजन के बाद कलम्पों को पॉलीथीन बैग में लगाकर पॉलीहाउस में जिसका तापमान 18 से 20 डिग्री सेंटीग्रेड तथा आर्द्रता 80 प्रतिशत तक हो, वहाँ पर रखना चाहिए| इस विधि द्वारा 15 से 20 दिनों में पौधे क्यारी में स्थानान्तरण के लिए तैयार हो जाते हैं| पौध रोपण के तुरन्त बाद जो फूल आते हैं, उन्हें शुरु में तोड़ देते हैं| जब तक पौधे पर कम से कम 6 से 7 बड़ी आकार की पत्तियों न हो जाएं तब तक पुष्प उत्पादन नहीं किया जाता है|

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