इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर धौलपुर (राजस्थान) में खेती का नवाचार कर रहे मोहित चौधरी विदेशी फूलों, ताइवानी पपीते की फसलों से साल में कम से कम एक करोड़ रुपए कमाना चाहते हैं। उनके फूलों की दिल्ली, आगरा, ग्वालियर की मंडियों तक डिमांड है। गेंदे की पहली ही पैदावार से उन्हे ढाई लाख रुपए मुनाफा मिला।
उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को आज कल खेती-बाड़ी का नवाचार भी खूब आकर्षित करने लगा है। देश का शायद ही कोई राज्य ऐसा हो, जहां ऐसे युवा जीवन के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में नवाचार करते हुए न मिल जाएं। ऐसे ही उत्साही युवा हैं मनियां, धौलपुर (राजस्थान) के गांव जगरियापुरा के मोहित चौधरी, जो एमएससी कंप्यूटर इंजीनियर की लगी-लगाई नौकरी छोड़कर अपने ढाई बीघे खेत में फूल खिला रहे हैं।
उनके खेतों में खिले फ्रेंच एंड अफरीकन गेंदा के फूलों की मंडियों और फूल के कारोबारियों में जबरदस्त डिमांड है। कृषि में करियर बन चुका उनका नवाचार अच्छी कमाई के साथ परवान चढ़ने लगा है।
खेती से कमाना चाहते हैं 50 लाख
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मोहित बताते हैं कि अब पारंपरिक खेती में घर-परिवार चलाने लायक कमाई नहीं हो पाती है। उनके पिता भी किसानी करते हैं। वह इंजीनियरिंग की नौकरी करते रहते तो पिता की खेती-बाड़ी कौन संभालता। खेत बंजर हो जाते। यही सोचकर उन्होंने खेती में नवाचार का संकल्प लिया और फूलों की खेती करने लगे। वह इस नवाचार से सालाना कम से कम 50 लाख रुपए कमाना चाहते हैं।
उनके फूलों की है जोरदार डिमांड
आजकल दिल्ली की गाजीपुर मंडी के साथ ही ग्वालियर और आगरा की मंडियों में भी उनके फूलों की खूब डिमांड है। उन्होंने अपने संभाग में पहली बार फ्रेंच मैरी गोल्ड की खेती जब शुरू की तो उसकी पौध बंगलूरु से मंगानी पड़ी। अब तो वह ताईवानी पपीते कीभी खेती करना चाहते हैं, साथ ही एक ही खेत में इंटरक्रॉप खेती कर छह फसलें पैदा करना चाहते हैं।
