इस बार सरसों की फसल (Mustard Crop) किसानों के लिए बंपर कमाई (Farmers Income) वाली फसल साबित होगी. इसकी कई वजह हैं. एक तो सरकार ने इस बार सरसों की कीमतों में 225 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है. इस इजाफे के बाद सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य-एमएसपी (Mustrad MSP) 4650 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है.
इसके अलावा सरकार ने सरसों के तेल (Mustard Oil) में किसी भी प्रकार का अन्य खाद्य तेल मिलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इससे तेल मिलों में सरसों की डिमांड और कीमत, दोनों में ही इजाफा होगा.
सरसों की बुआई का समय भी आ गया है. वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और खेकड़ा (बागपत) कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra, Baghpat) के सहायक निदेशक डॉक्टर संदीप चौधरी किसानों को सरसों की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में बता रहे हैं.
सरसों की खेती (Mustard farming) मुख्य रूप से भारत के सभी क्षेत्रों पर की जाती है| सरसों की खेती (Mustard farming) हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की एक प्रमुख फसल है| यह प्रमुख तिलहन फसल है| सरसों की खेती (Mustard farming) खास बात है की यह सिंचित और बारानी, दोनों ही अवस्थाओं में उगाई जा सकती है|
इसका उत्पादन भारत में आदिकाल से किया जा रहा है| इसकी खेती भारत में लगभग 66.34 लाख हेक्टेयर भूमि में की जाती है, जिससे लगभग 75 से 80 लाख उत्पादन मिलता है| सरसों की यदि वैज्ञानिक तकनीक से खेती की जाए, तो उत्पादक इसकी फसल से अधिकतम उपज प्राप्त कर सकते है| इस लेख में सरसों की उन्नत खेती कैसे करें की पूरी जानकारी का उल्लेख किया गया है|
उपयुक्त जलवायु
भारत में सरसों की खेती (Mustard farming) शीत ऋतु में की जाती है| इस फसल को 18 से 25 सेल्सियस तापमान की आवष्यकता होती है| सरसों की फसल के लिए फूल आते समय वर्षा, अधिक आर्द्रता एवं वायुमण्ड़ल में बादल छायें रहना अच्छा नही रहता है| अगर इस प्रकार का मोसम होता है, तो फसल पर माहू या चैपा के आने की अधिक संभावना हो जाती हैं|
भूमि का चयन
सरसों की खेती रेतीली से लेकर भारी मटियार मृदाओ में की जा सकती है| लेकिन बलुई दोमट मृदा सर्वाधिक उपयुक्त होती है| यह फसल हल्की क्षारीयता को सहन कर सकती है| लेकिन मृदा अम्लीय नही होनी चाहिए|
खेत की तैयारी
किसानों को सरसों की खेती के लिए खेत की तैयारी सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करनी चाहिए, इसके पश्चात दो से तीन जुताईयाँ देशी हल या कल्टीवेटर से करना चाहिए, इसकी जुताई करने के पश्चात सुहागा लगा कर खेत को समतल करना अति आवश्यक हैं| सरसों के लिए मिटटी जितनी भुरभुरी होगी अंकुरण और बढवार उतनी ही अच्छी होगी|
