खेतों में बैंगन उगाना – सोच-समझकर और बड़े पैमाने पर की गयी बैंगन की खेती आय का बढ़िया स्रोत हो सकती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो बैंगन एक बारहमासी पौधा है, लेकिन ज्यादातर किसान इसे वार्षिक पौधे के रूप में लगाते हैं। बैंगन के ज्यादातर व्यावसायिक किसान फसल को आंतरिक सुरक्षित परिवेश में बीजों (हाइब्रिड) से शुरू करते हैं। पौधे उगने का इंतज़ार करते हुए और उनकी रोपाई की तैयारी करते हुए (सामान्य तौर पर 4-6 हफ्ते), वो खेत तैयार करते हैं। वे खेत की जुताई करके क्यारियां बना देते हैं और पंक्तियों में काली प्लास्टिक की फिल्म बिछा देते हैं। काला प्लास्टिक न केवल मिट्टी की गर्म रहने में सहायता करता है, बल्कि जंगली घास भी नियंत्रित करता है। वो ड्रिप सिंचाई प्रणाली डिज़ाइन करके, उसे भी लगा देते हैं। रोपाई के लिए तैयार होने पर, वो प्लास्टिक की फिल्म में छोटे-छोटे छेद कर देते हैं, जहाँ वो छोटे गड्ढे बनाकर पौधों की रोपाई करते हैं। ज्यादातर मामलों में उर्वरीकरण, ड्रिप सिंचाई और जंगली घास के प्रबंधन का प्रयोग किया जाता है। जब पौधा 40 सेमी (16 इंच) का हो जाता है तो ज्यादातर किसान पौधों को सहारा देने के लिए, वायु संचार बेहतर बनाने के लिए और कुछ हफ्ते बाद फसल की कटाई में सुविधा के लिए पौधों में डंडिया लगा देते हैं। पौधों को पतला करने की प्रक्रिया भी प्रयोग की जाती है। व्यावसायिक बैंगन उत्पादक खराब या अविकसित फलों को हटा देते हैं ताकि पौधे अपने संसाधनों को बड़े और ज्यादा स्वादिष्ट फल उगाने के लिए प्रयोग कर सकें। बैंगन की अधिकांश व्यावसायिक किस्मों को रोपाई के 60-100 दिनों के बाद काटा जा सकता है। रोपाई से लेकर कटाई तक का समय पौधे की किस्म, जलवायु की स्थितियों और लगाए गए पौधों की आयु पर निर्भर करता है। कटाई केवल कैंची या चाकू के माध्यम से की जा सकती है और आमतौर पर एक से ज्यादा सत्रों में की जाती है। कटाई के बाद, बैंगन उगाने वाले किसान खेत में हल चलाकर, फसल के अवशेष को नष्ट कर देते हैं। बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए या मिट्टी को क्षय से बचाने के लिए, वो फसल चक्र (पत्तागोभी, मक्का, दाल आदि) का प्रयोग भी कर सकते हैं।
बैंगन उगाते समय प्रतिबंधात्मक कारक हमेशा जलवायु होता है। बैंगन का पौधा गर्म जलवायु से आता है। यह कम तापमान और तुषार के प्रति बेहद संवेदनशील पौधा है। इसके लिए 21 से 30°C (70 से 85 °F) के औसत तापमान की आवश्यकता होती है, जबकि मिट्टी का तापमान 20 °C (68 °F) से कम नहीं होना चाहिए। बैंगन उगाने की अवधि के दौरान ठंडा मौसम पौधे के विकास को रोक देगा और ठंड से प्रभावित पौधों के लिए रिकवर होना और अच्छी पैदावार देना लगभग नामुमकिन हो जायेगा।
सबसे पहले, बैंगन उगाने की विधि साथ ही साथ हमारे क्षेत्र में फलने-फूलने लायक बैंगन की किस्मों का फैसला करना जरूरी है। बैंगन उगाने की 2 विधियां हैं: बीज से उगाना और पौधों से उगाना।
