यह गर्म जलवायु का पौधा है| सूखे और गर्म मौसम के लिए यह एक उपयुक्त फसल है| अत्यधिक बरसात तथा ठण्ड को यह सहन नहीं कर पाता है| शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में जहाँ बरसात कम परन्तु एक नियमित अन्तराल पर हो तो ग्वार की फसल से अत्यधिक उत्पादन लिया जा सकता है| उन प्रदेशों में जहा अत्यधिक गर्मी पड़ती है और सिंचाई की सुविधा हो तो ग्वार की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है|
भूमि का चयन
सभी तरह की भूमि में इसकी खेती सुगमता से की जा सकती है, परन्तु उचित जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त मानी गई है| उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र की रेतीली मिट्टी भी ग्वार फली फसल के लिए उपयुक्त है| इसकी खेती हल्की क्षारीय व लवणीय भूमि में जिसका पी एच मान 7.5 से 8.0 तक हो वहाँ भी की जा सकती है|
बुवाई का समय
ग्वार फली के उत्पादन हेतु जायद की फसल के लिए बुवाई फरवरी से मार्च और वर्षा ऋतु की फसल के लिए बुवाई जून से जुलाई माह में करने पर उपयुक्त रहती है|
खेत की तैयारी
ग्वार फली की भरपूर पैदावार के लिए खेत का चयन और उसकी तैयारी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है| विभिन्न जलवायु में कृषि उत्पादन स्थिर बनाने के लिए फसल क्षेत्र प्रबन्धन तकनीकों को अपनाकर फसल परिक्षेत्र की सूक्ष्म जलवायु को अनुकूल बनाना अत्यन्त आवश्यक है| ग्वारफली की जायद की फसल बुवाई हेतु खेत को नवम्बर से दिसम्बर में जुताई कर खरपतवारों से मुक्त रखना चाहिए| इस समय खेत की जुताई करने से सर्दी की ऋतु में होने वाली बरसात का पानी खेत में ही संचित हो सकेगा जो कि जायद की फसल के लिए लाभदायक रहता है| वर्षाकालीन ग्वार फली की फसल हेतु खत की जुताई जून के अंतिम पखवाड़े में करें|
इस समय खेत को एक बार आड़ा व तिरछा जोतकर उसमें लगभग 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की सड़ी खाद मिलाकर खेत में पाटा लगाकर तैयार कर देना चाहिए| वर्षा ऋतु वाली फसल के लिए इस तरह तैयार खेत में खरपतवार कम उगते हैं और अधिक वर्षा जल का संचय होता है| खेत को समय पर तैयार रखने से जुलाई के महीने में वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही फसल बुवाई समय पर सम्भव हो सकती है| वर्षा आधारित ग्वार फली उत्पादन के लिए खेत का चयन और समय पर उसकी तैयारी पर विशेष ध्यान कर फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है|
