4.लाल पत्ता गोभी की खेती के लिए जानने योग्य आवश्यक बातें
लाल पत्ता गोभी की खेती के लिए हल्की दोमट भूमि सबसे अच्छी रहती है।
इसे हल्की चिकनी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।
भूमि का पी.एच. मान 6.0-7.0 के बीच होना चाहिए।
इसकी खेती के लिए आवश्यक तापमान 20-30 डिग्री सेंटीगे्रड के बीच होना चाहिए।
अधिक तापमान पर इसके हैड स्वस्थ नहीं तैयार हो पाते।
लाल पत्ता गोभी का बुवाई का समय मध्य सितंबर से मध्य नवंबर तक होता है।
पत्ता गोभी की रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि भूमि में नमी बनी रहे।
शीषों को पूर्ण विकसित होने पर ही इसकी कटाई करनी चाहिए। जल्द कटाई करने से
इसके आकार में कमी आ जाती है।
लाल पत्ता गोभी के लिए खेत की तैयारी
लाल पत्ता गोभी की खेती के खेत तैयार करने के लिए खेत की मिट्टी पलटने वाले हल या हैरो से दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए और प्रत्येक जुताई के बाद पाटा चलाना चाहिए। ताकि मिट्टी समान रूप से एक जैसी हो जाए ताकि बुवाई करने में आसानी रहे। खेत में 8-10 दिन के अंतराल से जुताई करनी चाहिए ताकि खेत में पिछली बाई हुई फसल के अवशेष, घासफूस व कीट पूर्ण रूप से नष्ट हो जाए। इसके बाद समान आकार की क्यारियां बनानी चाहिए।
बीज की मात्रा व बुवाई का तरीका
लाल पत्ता गोभी की खेती के लिए 400-500 ग्राम प्रति हैक्टेयर तथा 200-250 ग्राम प्रति एकड़ बीज की आवश्यकता होती है। लाल पत्ता गोभी के बीज की बुवाई के लिए ऊंची पौधशाला में क्यारी तैयार करें तथा इस क्यारी में छोटी-छोटी 2-4 सेमी. दूरी की पंक्ति बनाकर 2-3 सेमी. की गहराई रखकर बीज 1-4 मि.मी. की दूरी पर बुवाई करें। इसके बाद इन पंक्तियों में पत्ती की सड़ी खाद या कम्पोस्ट बारीक करके हल्की परत देकर ढंक दें तथा हल्की सिंचाई करें। इस प्रकार से 20-25 दिन में पौध तैयार हो जाती है। बीज को बोने के बाद जब पौधे 10-12 सेमीमीटर ऊंची हो जाए तो इसे क्यारियों लगाएं। क्यारियों में लगाते समय इनके बीच उचित दूरी का ध्यान अवश्य रखना चाहिए ताकि पौधों को विकसित और फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। इसके लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी. एवं पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी. रखनी चाहिए।
खाद व उर्वरक की मात्रा
सड़ी हुई गोबर की खाद 10-12 टन प्रति हैक्टर खेत तैयारी पर जुताई के समय मिला दें। इसके बाद 60 किलो नत्रजन, 40 किलो फास्फोरस तथा 40 किलो पोटाश प्रति हैक्टर के हिसाब से दें। आधी नत्रजन, फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा को खेत तैयारी के समय दें तथा आधी शेष नत्रजन पौध रोपाई के 30 दिन व 60 दिन बाद दो बार में खड़ी फसल में छिडक़र देने से स्वस्थ हैड प्राप्त होते हैं ।
कब-कब करें सिंचाई
लाल पत्तागोभी की प्रथम हल्की सिंचाई पौध की रोपाई तुरंत बाद करनी चाहिए। इसके बाद 12-15 दिन के अंतराल में सिंचाई करते रहना चाहिए। इसके अलावा आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण
पौध की रोपाई के 15-20 दिन बाद छोटे-छोटे खरपतवार व घास उग आती है। इन्हें निकालना बहुत आवश्यक है। अन्यथा खाद्य-प्रतियोगिता से मुख्य फसल के पौधे कमजोर पड़ जाएंगे। खरपतवार निकालते समय खुरपी का इस्तेमाल करना चाहिए। हाथ से खरपतवार नहीं निकालना चाहिए क्योंकि इससे हाथ में एलर्जी होने की समस्या हो सकती है। यदि संभव को तो प्लास्टिक के दस्ताने पहन कर ही खरपतवार निकालने का काम करना चाहिए।
निराई – गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाना
एक या दो सिंचाई के बाद निराई-गुडाई का कार्य किया जा सकता है। इसके लिए खुरपी की सहायता से मिट्टी को पौधे की जड़ के पास चढ़ा देना चाहिए जिससे पौधा गिरता नहीं है। पौधे पर 10-12 सेमी मिट्टी चढ़ा दें। इस प्रकार लाल पत्ता गोभी के पौधे की दो से तीन बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। निराई-गुडाई के दौरान यदि आवश्यकता हो तो हल्की सिंचाई कर सकते हैं।
कीट व रोगों से सुरक्षा
लाल पत्ता गोभी की फसल को कैटरपिलर व एडिस कीट से काफी नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफास तथा मेटासीड के 1-2 प्रतिशत घोल का छिडक़ाव करना चाहिए। वहीं सडऩ रोग व पत्तियों पर धब्बे होने पर फफूंदीनाशक बेवस्टीन या डाइथेन, एम- 45 को 2 ग्राम प्रति लीटर के घोल का छिडक़ाव करना चाहिए ।
कटाई व पैदावार
शीषों को पूर्ण विकसित होने पर ही इसकी कटाई करनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक हैं कि जब शीर्ष कठोर हो जाए तथा रंग लाल, आकार बड़ा हो जाए। तब पत्तियों सहित इसकी कटाई करें। इस दौरान एक-दो पत्तियों को कम किया जा सकता है। इससे लाल पत्ता गोभी ताजी बनी रहती है। बात करें इसकी पैदावार की तो इसकी 150-200 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उपज प्राप्त होती है।
